जम्मू कश्मीर की जांच एजेंसी (एसआईए) ने गुरुवार (20 नवंबर) को जम्मू में कश्मीर टाइम्स के कार्यालय पर यह दावा करते हुए छापा मारा कि इसकी गतिविधियां “राज्य के खिलाफ” हैं, जबकि वेबसाइट के संपादकों ने आरोप को “बेबुनियाद” करार दिया और कहा कि यह कार्रवाई समाचार संस्थान को चुप कराने की एक और कोशिश है।
इंडियन एक्सप्रेस ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से कहा कि स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) के छापे समाचार संस्थान के खिलाफ दाखिल एफआईआर के बाद मारे गए, जिसमें कि आरोप लगाया गया है कि समाचार संस्थान देश-द्रोही गतिविधियों में संलिप्त है और देश के खिलाफ असंतोष फैलाने के प्रयास करता है।
दूसरी तरफ, कश्मीर टाइम्स के संपादकों प्रबोध जामवाल और अनुराधा भसीन ने बयान जारी कर कहा कि सरकार की आलोचना करना राज्य के खिलाफ होना नहीं है।
संपादकों के बयान में कहा गया, “वास्तव में यह बिल्कुल उल्टा है। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए मजबूत प्रेस जरूरी है। सत्ता को जवाबदेह बनाना, भ्रष्टाचार की जांच करना, हाशिये के लोगों की आवाजों को बढ़ाना देश को मजबूत करता है, कमजोर नहीं करता।”
बयान में कहा गया है कि कश्मीर टाइम्स, जिसके संस्थापक संपादक वेद भसीन थे, 1954 से स्वतंत्र पत्रकारिता के एक स्तम्भ के रूप में खड़ा है और इस समाचार संस्थान ने “क्षेत्र की सफलताओं और विफलताओं का” समान रूप से दस्तावेजीकरण किया है।
“हमने तब मुश्किल सवाल पूछे जब दूसरे चुप रहे। हमें इसीलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि हम यह काम जारी रखे हुए हैं। एक ऐसे समय में जब आलोचनात्मक स्वर कम होते जा रहे हैं, हम चंद स्वतंत्र संस्थानों में से हैं जो सत्ता से सच बोल रहे हैं।”
संपादकों ने कहा कि समाचार संस्थान के खिलाफ लगाए आरोप “उन्हें धमकाने, अवैध ठहराने और अंत में चुप कराने” के लिए हैं।
“लेकिन हम चुप नहीं रहेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा।
संपादकों ने अधिकारियों से “इस प्रताड़ना को तुरंत बंद करने, यह बेबुनियाद आरोप वापस लेने और प्रेस की आजादी की संवैधानिक गारंटी का सम्मान करने” को कहा है। बयान में मीडिया बिरादरी से कश्मीर टाइम्स के साथ खड़े होने की अपील भी की गई है।
बयान में कहा गया है, “हम नागरिक समाज, उन सभी लोगों जो जानने के अपने अधिकार का महत्व जानते हैं, से आह्वान करते हैं कि इस पल की शिनाख्त करें जो इस की परख करने वाला है कि क्या पत्रकारिता बढ़ते अधिनायकवाद के इस माहौल में बच सकती है?”
संपादकों ने यह भी कहा, “पत्रकारिता अपराध नहीं है। जवाबदेही गद्दारी नहीं है। और हम उन लोगों, जो हम पर निर्भर हैं, को सूचित करना, जांच करना और पैरोकारी करना जारी रखेंगे। राज्य को हमारे कार्यालयों पर छापा मारने की ताकत है लेकिन सच के प्रति हमारी कटिबद्धता पर छापा मारने की नहीं।”
बयान में यह भी बताया गया है कि कश्मीर टाइम्स का प्रिन्ट संस्करण “लगातार निशाना बनाए जाने के कारण” 2021-22 से बंद है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, छापे से पहले दाखिल की गई एफआईआर में कथित गतिविधियों और कम्यूनिकेशन का ज़िक्र था, जिनकी “भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए संभावित खतरों” के लिए जांच की जा रही थी।
अखबार ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि छापे सुबह छह बजे शुरू हुए। एसआईए अधिकारियों ने दस्तावेज़ों, डिजिटल उपकरणों और सामग्री की जांच की।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार संस्थान की वेबसाइट पर जामवाल संपादक दर्शाये गए हैं और अनुराधा भसीन प्रबंध संपादक। दोनों कुछ समय पहले अमेरिका चले गए हैं और वहीं रहते हैं।
(स्क्रोल से साभार)